मेरी चाहत के तलबगार न हुए तुम
मेरी उम्मीदों पर वफ़ादार न हुए तुम
हम तो होके रह गए सिर्फ तुम्हारे
पर हमारे हो न सके तुम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Name *
Email *
Website